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| मातृ िदवस पर िवशेष |
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Submitted by : Chetna Singh, Hindi Teacher, CCS Nahan
कहानी - रानी और जलपरियॉं
रानी एक नन्ही सी प्यारी बच्ची थी । वह बचपन में ही अपने िपता को खो चुकी थी । घर में सिर्फ दो ही प्राणी थे । एक थी रानी ओर उसकी विधवा मां, रानी जब स्कूल चली जाती तब रानी की मां सारे मौहल्ले के कपडे लेकर उन्हे धोने के लिए नदी के किनारे ले जाती व कपडे धोने से जो पैसे उसे मिलते थे उससे अपना व रानी का पेट पालती थी ।
रानी अपनी मां के लिए कुछ भी कर सकती थी । वह पहाडी की ओर चल पडी, रास्ते में जंगली जानवर, शेर, चिते, भालू, भेडियों ने उसका रास्ता रोक लिया । वे बोले -÷÷ ठहरो, नदान लडकी तुम हमारा शिकार हो । रानी ने बिना डरे कहा -÷÷ मैं अपनी मां को आजाद करवाना चाहती हुूुं , तुम भी तो कभी अपनी मां के बच्चे थे । मैं अपना कार्य समाप्त कर आउं, तब तुम मुझे खा लेना । रानी ने सारी बात उन जानवरों को बतला दी । अब शेर, भालू , चीते उसे खाना नहीं चाहते थे । क्योंकि रानी एक नेक काम के लिए जा रही थी । हांफते -हांफते रानी पहाडी पर रहने वाली बुढ़िया के पास पहुंची । उसने सारा घर व सारा आस-पडोस छान लिया पर मां कहीं नहीं मिली। आखिर रानी का अपनी मां के सिवाय था ही कौन ? वह जोर-जोर से रोते - रोते नदी के किनारे जा पहुंची, उसने देखा नदी के तट पर बाल्टी,साबुन व कपडे बिखरे पडे थे, पर मां का कहीं अता-पता न था उसे रोते देख नदी में रहने वाली बडी मछली उसके पास आई व बोली ÷÷ रानी, में जानती हुं कि तुम्हारी मां कहां पर है, आज तुम्हारी मां ने नदी में रहने वाली जलपरियों को स्नान करते हुए देख लिया था । वो ही तुम्हारी मां को पकड़कर जल महल में ले गई है । रानी बोली ÷÷ अच्छी मछली, क्या तुम मेरी सहायता कर सकती हो ? मैं भी जल महल में जाना चाहती हुं । मछली ने कहा पर तुम्हे मेरे मुख के भितर छिप कर जाना होगा । वरना जल में रहने वाले जीव-जन्तु तुमको खा जायेंगे । रानी मछली के मुंह में बैठकर जल महल के द्वार पर पहुंच जाती है । मछली बोली ÷÷ अच्छा, रानी इससे आगे मैं नही जा सकती, इससे आगे का रास्ता तुम्हे खुद तय करना होगा । रानी ने जल महल में प्रवेच्च किया । वहां बहुत सी जल परियां नाच गा रही थी । जैसे ही परियों की नजर रानी पर पड़ी, उन्होने चिल्ला कर कहा - ऐ लड़की तु यहां कैसे आई -÷÷ रानी ने निडर हो कर कहा - मैं अपनी मां को वापिस लेने आई हुंॅ । परियों ने कहा, कि हम एक शर्त पर तुम्हारी मां को वापिस लौटा सकते है, अगर तुम दुर पहाडी पर रहने वाली बुढ़िया से सदा जवान ओर अमर रहने वाला बद्य्र्र कमल का फूल लेकर आओ हम उसे नही ला सकती क्योंकि उसको कोई छोटी बच्ची ही हाथ लगा सकती है । वहां जाकर रानी ने देखा, कि एक सफेद बालों वाली बुढ़िया परिंयों के लिए सुन्दर कपडे व गाउन बना रही थी । सारा घर अस्त-व्यस्त पडा था । बुढ़िया ने काफी दिनों से भोजन भी नहीं खाया था । उसके घर में गंदे कपडों का ढेर लगा था । रानी ने सबसे पहले सारा घर साफ किया, रसोई में जाकर स्वादिष्ट खाना बनाया । तथा गंदे कपडे धो कर सुखाने के लिये डाल दिये । बुढ़ी मां जब अपनी रसोर्ई में पहुुंची तो वहां पर गर्मा-गर्म स्वादिष्ट भोजन की सुगन्ध आ रही थी । सारा घर साफ सुथरा जग-मग कर रहा था । कपडे भी धुल चुके थे । वह बोली -÷÷ कौन है ? मेरे सामने आओ मैं देखना चाहती हुं, किसने मेरे घर को स्वर्ग सा सुन्दर बनाया है । रानी डरती - डरती बुढिया के पास पहुंची प्रणाम दादी मां- - - बुढिया हैरान हो कर बोली -÷÷ अरे इतनी छोटी बच्ची ओर इतना काम रानी बोली, ÷÷दादी मां, मै मुसीबत में हुं, मेरी मां जल परियों की कैद में है । जल परियां आपसे एक जादुई फूल चाहती है । जिससे वो सौ साल के लिए अमर हो जायें । तभी वे मेरी मां को आजाद करेंगंी । दादी मां बोली-÷÷ पर बेटी ये तो ओर भी खतरनाक होगा अगर परियां अमर हो गई तो न जाने कितने ही लोगों को तंग करेगी । मेरे पास बिल्कुल वैसा ही एक ओर जादुई फूल है । उसे सुंघने से परियां सौ साल के लिए सौ जायेगीं । बुढिया से फूल लेकर रानी जल्दी ही परियों के पास पहुंची । जैसे ही परियों ने वह फूल सुंघा वे एक एक करके बेहोच्च हो गई तथा सौ साल के लिए सौ गई । रानी ने जल्दी ही अपनी मां को कैद से आजाद करवाया तथा मछली को पुकारा -÷÷ नेक दिल मछली, हमारी सहायता करो । मछली उन्हे वापिस धरती पर ले आई । इस प्रकार रानी ने अपनी बुद्धिमानी व साहस से अपनी व अपनी मां की प्राणो की रक्षा की । लेखिका :- कु० चेतना सिंह |
| Last Updated on Sunday, 10 May 2009 20:19 |









